Mangal Dosha: सच क्या है, मिथक क्या — एक ज्योतिषी की राय
पिछले महीने एक परिवार मेरे पास आया। लड़की का रिश्ता तय होने वाला था, लेकिन लड़के वालों ने पत्री देखकर मना कर दिया — वजह थी मंगल दोष। लड़की रो रही थी। उसे लग रहा था जैसे उसकी कुंडली ने उसकी ज़िंदगी बर्बाद कर दी।
मैंने उसकी पत्री उठाई। मंगल पाँचवें भाव में था। अब बताइए — क्या यह सच में दोष है?
मंगल दोष असल में क्या है?
मंगल जब 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में हो तो उसे मंगली या मंगल दोष कहते हैं। कुछ ज्योतिषी 2वें भाव को भी इसमें जोड़ते हैं। लेकिन यह दोष हर कुंडली में एक जैसा असर नहीं करता।
दोष कमज़ोर कब पड़ता है?
- अगर मंगल अपनी राशि मेष या वृश्चिक में हो।
- अगर मंगल के साथ गुरु बैठे हों।
- अगर मंगल उच्च का हो यानी मकर राशि में।
- अगर लग्न मेष या वृश्चिक हो।
तो क्या करें?
एक अच्छे ज्योतिषी से पूरी कुंडली दिखवाएँ — सिर्फ मंगल नहीं। विवाह के लिए सप्तम भाव, सप्तमेश, शुक्र और चन्द्रमा — इन सब का अध्ययन जरूरी है। मंगल दोष एकमात्र कारण नहीं होना चाहिए किसी रिश्ते को नकारने का।
उस लड़की की पत्री में मंगल दोष था, लेकिन उसका विवाह योग बहुत मजबूत था। आज वह सुखी है।
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