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Panchang Kya Hai aur Isey Kyun Padhna Chahiye?
पंचांग सिर्फ पुराने लोगों की चीज़ नहीं है। यह एक व्यावहारिक उपकरण है जो बताता है कि कौन सा दिन किस काम के लिए सही है। आइए समझते हैं इसके पाँच अंगों को।
मेरे दादाजी रोज़ सुबह उठकर पहले पंचांग देखते थे। उस समय मुझे लगता था यह बस एक पुरानी आदत है। लेकिन जब मैंने ज्योतिष पढ़ना शुरू किया, तब समझ आया कि वे हर दिन के "मौसम" की जाँच करते थे — मौसम जो नक्षत्रों और ग्रहों से बनता है।
पंचांग के पाँच अंग
- तिथि — चंद्रमा की स्थिति से बनती है। कुल 30 तिथियाँ होती हैं।
- वार — सप्ताह का दिन। हर वार एक ग्रह से जुड़ा है।
- नक्षत्र — चंद्रमा जिस नक्षत्र में हो, उस दिन उसी का प्रभाव रहता है।
- योग — सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त स्थिति से बनता है। 27 योग होते हैं।
- करण — तिथि का आधा भाग। यह दिन में दो बार बदलता है।
रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कैसे काम आता है?
नया काम शुरू करना हो, गृह प्रवेश हो, विवाह की तारीख तय करनी हो — पंचांग बताता है कि इन सबके लिए कौन सा दिन और कौन सा समय सर्वश्रेष्ठ है। अगर आप सिर्फ यह जान लें कि राहुकाल और यमगंड के समय कोई नया काम न शुरू करें, तो आपने पंचांग का सबसे ज़रूरी हिस्सा सीख लिया।
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